Friday, January 24, 2014

इनकी आँखों में नीर आ जाए !




तूने तो बख्शी थी इंसानियत हर इंसा को।
मगर यहाँ तो इब्लीसों का बोलबाला है।

कहर है बरपाते हैं आदमी आदिमियत पर।
कहते है ये जेहाद का तहोबाला है।

तूने तो भेजा था मोहब्बत का सबक देकर इनकों।
यहाँ तो नफ़रत का बोलबाला है।

ये खुदा ये तेरे बन्दे सब इब्लीस हो गए।
फरिश्तों ने भी अपनी सिफ़त को बेंच डाला है।
अब सिर्फ तेरे हाज़िर और नाज़िर की जरूरत ही क्या।
जब तेरी कायनात में कुफ्र की पाठशाला है।

जल्द ही तेरा फज़ल हो जाए
इनकी आँखों में नीर आ जाए

इनकी बदनीयत बदल जाए नेकनीयती में
गर तेरा करम हो जाए।

कृष्ण कुमार मिश्र ।।कृष्ण।।

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